नालागढ़ ब्रेकिंग : रेमडेसिविर इंजेक्शन के अवैध सौदे के बीबीएन से जुड़े तार

डोमेस्टिक सेल की अनुमति न होने के बाबजूद भी किया जा रहा था सौदा, बद्दी के उद्योग के पास 11 अप्रैल तक थी एक्सपोर्ट की अनुमति, विदेश से आर्डर मिलने पर निर्माण का था लाईसेंस, हेल्थ वॉयोटेक का डायरेक्टर है एसआईटी की गिरफ्त में, 4 अन्य भी हैं गिरफ्तार

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नालागढ़। कोरोना महामारी के गंभीर मरीजों को दिए जाने वाले इंजेक्शन रेमडेसिविर के चंडीगढ़ में होने वाले सौदे के तार हिमाचल से जुड़े हैं। जहां सरकार कोरोना के इंजेक्शन को कम दाम पर उपलब्ध करवा रही है वहीं इसके निर्माता अवैध तरीके से मंहगे दामों पर इनको बेचकर लाभ लेने की फिराक में हैं। चंडीगढ़ पुलिस ने सेक्टर-17 के ताज होटल में दबिश देकर रेमडेसिविर इंजेक्शन के अवैध सौदे को भंडाफोड़ किया है। जिसमें एनएच बद्दी-नालागढ़ पर संडोली में स्थित दवा उद्योग के डायरेक्टर को गिरफ्तार किया गया है। पुख्ता जानकारी के अनुसार हैल्थ बॉयोटेक उद्योग के पास रेमडेसिविर इंजेक्शन के एक्सपोर्ट निर्माण की मंजूरी थी जिसे 11 अप्रैल को रद्द कर दिया गया था। यानि के किसी देश से आर्डर आने के बाद ही उद्योग इस इंजेक्शन का निर्माण करके एक्सपोर्ट कर सकता था। जबकि कंपनी के पास स्थानीय बाजार (डोमेस्टिक मार्केट) में इसे बेचने की मंजूरी नहीं थी। पता चला है कि कंपनी ने डोमोस्टिक मार्केट में सेल के लिए अप्लाई भी किया है लेकिन अभी तक मंजूरी नहीं मिली थी। बाबजूद इसके कंपनी के डायरेक्टर रेमडेसिविर इंजेक्शन को लोकल मार्केट में मंहगे दामों पर बेचने के लिए डील कर रहे थे, जिसका चंडीगढ़ पुलिस ने भंडांफोड़ कर दिया।
एसआईटी द्वारा जो हैल्थ बॉयोटेक से 3 हजार इंजेक्शन बरामद किए गए हैं उस पर भी मैनूफैक्चरिंग अप्रैल माह की है। सोमवार को इस पूरे मामले की जांच कर रही चंडीगढ़ पुलिस की एसआईटी टीम ने ड्रग कंट्रोलर कार्यालय बद्दी में दस्तक दी और कंपनी के रिकार्डस खंगाले जा रहे हैं। वहीं पुख्ता जानकारी के अनुसार इस पूरे मामले में बद्दी और सिरमौर के पांच उद्योग रडार पर हैं।
दूसरी ओर, रेमडेसिविर इंजेक्शन सौदे का प्रकरण सामने आने के बाद ड्रग विभाग ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। वहीं विभाग ने बद्दी स्थित उद्योग के स्टाफ को भी जहां ड्रग कार्यालय में तलब किया है। उद्योग के तीन महीने के रिकार्ड और स्टॉक की भी जांच की जा रही है। जांच के बाद पांच सदस्यीय कमेटी ड्रग विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। जबकि इस प्रकरण के बाद सिरमौर और बद्दी के पांच उद्योग भी रेडार पर हैं, जो जांच के शिकंजे में आ सकते हैं। इस पूरे प्रकरण के बाद कोरोना इंजेक्शन के निर्माण और सेल को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्टेट ड्रग कंटोलर नवनीत सिंह मरवाहा ने बताया कि चंड़ीगढ़ पुलिस को इस मामले में लीड मिली थी जिसके बाद पुलिस ने ड्रग विभाग व बद्दी पुलिस से संपर्क किया था। 17 अप्रैल की चंडीगढ़ पुलिस की कार्रवाई में ड्रग विभाग के ड्रग इंस्पेक्टर भी शामिल थे। विभाग ने इस मामले को लेकर दो तरह से जांच शुरू की है। कंपनी से जहां सारा रिकार्ड मांगा गया है वहीं पांच सदस्यीय टीम ज्वाईंट इंस्पेक्शन करके जांच रिपोर्ट ड्रग विभाग को सौंपेगी। कंपनी के पास एक्सपोर्ट लाईसेंस था, लेकिन डोमेस्टिक सेल की अनुमति कंपनी के पास नहीं थी। इस सारे प्रकरण की जांच चल रही है और चंडीगढ़ पुलिस की एसआईटी टीम भी ड्रग कार्यालय जांच के पहुंची है जिनका सहयोग किया जा रहा है।

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