उत्तराखंड… मंत्री जी तो बोलते रहते हैं क्‍या फर्क पड़ता है

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देहरादून। यह उत्‍तराखण्‍ड है यहां मंत्री तो बोलते रहते हैं उनकी बात कौन मान रहा है। जी यह सब लागू हो रहा राज्‍य के शिक्षा मंत्री पर। शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने घोषणा की थी कि शिक्षक सिर्फ पढ़ाएंगे, कुछ और कार्य नहीं करेंगे। राज्य के 72 हजार शिक्षकों से अब सिर्फ बच्चों को पढ़ाने के अलावा अन्य कोई काम नहीं लिया जाएगा, लेकिन अब शिक्षा विभाग, कृषि विभाग, आईटीआई, नगर निगम व पंचायतीराज विभाग के कर्मचारियों को बुधवार को जिला निर्वाचन कार्यालय देहरादून में उपस्थित होने के लिए कहा गया ।
प्रदेश में शिक्षक सिर्फ पढ़ाएंगे कुछ और कार्य नहीं करेंगे। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की इस घोषणा के बाद भी शिक्षकों की चुनाव प्रशिक्षण संबंधी ड्यूटी लगा दी गई है। इससे शिक्षकों में नाराजगी है। शिक्षक लंबे समय से गैर शैक्षणिक कार्य न कराए जाने की मांग करते आ रहे हैं।

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प्रदेश में नई शिक्षा नीति के शुभारंभ के दिन 12 जुलाई को शिक्षा मंत्री रावत ने घोषणा की थी कि शिक्षक सिर्फ पढ़ाएंगे, कुछ और कार्य नहीं करेंगे। राज्य के 72 हजार शिक्षकों से अब सिर्फ बच्चों को पढ़ाने के अलावा अन्य कोई काम नहीं लिया जाएगा। शिक्षक बीएलओ ड्यूटी नहीं करेंगे। उनका काम सिर्फ पढ़ाना होगा। इससे शिक्षकों को विभिन्न कार्यक्रमों से निजात मिलेगी, लेकिन शिक्षा मंत्री की इस घोषणा के एक सप्ताह बाद ही देहरादून में शिक्षकों की चुनाव प्रशिक्षण संबंधी ड्यूटी लगा दी गई है।

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सहायक निर्वाचक अधिकारी की ओर से इस संबंध में सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर कहा गया है कि शिक्षा विभाग, कृषि विभाग, आईटीआई, नगर निगम व पंचायतीराज विभाग के कर्मचारियों को बुधवार को जिला निर्वाचन कार्यालय देहरादून में उपस्थित होने के लिए कहा गया है।
उपस्थित न होने पर संबंधित के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 32 के तहत कार्रवाई की जाएगी। जिन शिक्षकों को चुनाव संबंधी प्रशिक्षण दिया जाना है उनका कहना है कि इसके बाद वह बीएलओ को प्रशिक्षण देंगे।

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इस संबंध में शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत व शिक्षा महानिदेशक बंशीधर तिवारी से संपर्क करने की कोशिश की गयी लेकिन काफी प्रयास के बाद भी सम्‍पर्क नहीं हो सका।
आरटीई में व्यवस्था है कि शिक्षकों की गैर शैक्षणिक कार्यों में ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी, गैर शैक्षणिक कार्यों से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। – आरके कुंवर, शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा

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