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    #पिथौरागढ़…कैसे रूकेगा अपराध : तस्कर हिरासत में, उनकी जेब में स्मैक, लेकिन तलाशी नहीं ले सकती पुलिस, राजपतित्र अधिकारी के तलाश में भटकते रहे 5 घंटे

    पिथौरागढ़। अपराध की रोकथाम का जिम्मा संभाल रही पुलिस के हाथ इस हद तक बंधे हैं कि नियमानुसार यदि कार्रावाई की जाए तो अपराधी कहीं का कहीं भाग जाए और पुलिस नियमों की जंजीर से ही बंधी रह जाए। आज ऐसा ही एक उदाहरण पिथौरागढ़ में देखने को मिला। जब स्मैक बेच रहे दो युवकों की तलाशी लेने के लिए पुलिस को पूरे 5 घंटे स्मैक तस्करों को लेकर यहां से वहां भटकना पड़ा। यह तब था कि जब पुलिस खुद ही कन्फर्म नहीं थी कि जिन युवकों उसने पकड़ा है उनके पास स्मैक है भी या वे स्वयं झूठ बोल रहे हैं। खैर अंत भला तो सब भला की तर्ज पर शाम पौने छह बजे दोनों युवकों की तलाशी में उनके हवाले से कुल 5.5 ग्राम स्मैक बरामद की जा सकी।


    इस 5 घंटे लबी पुलिस की राम कहानी की शुरूआत में हम बता दें कि स्मैक जैसे मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त आरोपी को पुलिस पकड़ तो सकती है लेकिन उसकी तलाशी राजपत्रित अधिकारी के सामने ही ली जा सकती है। ऐसे में पुलिस एसडीएम, तहसीलदार या फिर अपने सीओ की ओर ही उम्मीद भरी नजरों से देखती है। इनसे बड़े अधिकारी तो उसे घास भी नहीं डालेंगे।

    दरअसल मंगलवार की दोपहर लगभग पौने एक बजे कोतवाली से एसओजी के एसआई जावेद हसन, कोतवाली के एसआई पवन कुमार जोशी व एसओजी के कांस्टेबल संदीप चंद व बलवंत सिंह के साथ गश्त के लिए निकले। पुलिस की टीम चंद तिराहे पर पहुंची थी कि तहरीर के मुताबिक मुखबिर ने आकर सूचना दी कि सिनेमा लाइन में दो युवक स्मैक बेच रहे हैं। मुखबिर की सूचना पर यकीन करते हुए एसआई जावेद हसन ने एसआई पवन जोशी के मोबाइल फोन से कोतवाली में इस सूचना की जनकारी दी और अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए जाने की औपचारिक जानकारी दी। अब पुलिस टीम को यह सोचना था कि यदि दोनों युवकों से स्मैक बरामद हो गई तो उनकी तलाशी किसके सामने ली जाए। इस पर सबसे पहले उनके ख्याल में एसडीएम पिथौरागढ़ का नाम आया। उन्होंने एसडीएम पिथौरागढ़ को फोन मिलाया तो उन्होंने काम में व्यस्त होने के कारण मौके प पहुंचने में असमर्थता जता दी। उन्होंने यह भी बता दिया कि आज तहसीलदार भी सरकारी काम से बाहर गए हुए हैं।

    अब बारी थी सीओ साहब से मौके पर पहुंचने की गुजारिश करने की। साथ में एक इलैटानिक्स तराजू भी भिजवाने का आग्रह भी एसआई जावेद ने सीओ राजन सिंह रौतेला से कर दिया। कुछ देर में कांस्टेबल नरेश और पारस पाल कोतवाली से इलैक्ट्रानिक तराजू लेकर उनके पास आ गए।
    तहरीर के मुताबिक मुखबिर अभी भी पुलिस के पास ही खड़ा था। इसके बाद सभी पुलिस कर्मियों ने आपस में एक दूसरे की तलाशी लेकर जांच लिया कि उनमें से किसी के पास तो स्मैक जैसा कोई पदार्थ तो नहीं है। यह इसलिए आवश्यक है कि कई बार पकड़े गये व्यक्ति पुलिस पर ही अपनी जेब से नशीला पदार्थ उसकी जेब में डाल देने का आरोप लगा देते हैं। इस पूरी प्रकिया में लगभग डेढ बज चुका था।

    अब पुलिस टीम मुखबिर को साथ लेकर सिनेमा लाइन के लिए रवाना हुई। गली के मुहाने पर जाकर मुखबिर ठिठक गया। उसने वहीं से इशारा करके बता दिया कि कुछ कदम आगे सीढ़ियों पर दो बैठे दो युवक स्मैक बेच रहे हैं। इसके बाद मुखबिर चल गया। पुलिसकर्मी गली में आगे बढ़े तो सीढ़ियों में बैठे दो व्यक्तियों से उनका समाना हो भी गया। एसआई जावेद के अनुसार पुलिस वालो को देखकर सकपका गए तथा खडे होकर सीडियो पर चलने लगे जिनको पुलिसवालों ने पकड़ लिया। दोनों युवकों को नाम पता पूछा गया। इनमें से एक उततरी सिनेमा लाइन निवासी 26 वर्षीय चंद्रेक बिष्ट उर्फ शिवम था तथा दूसरा चामी लुमती, जौलजीवी निवासी 23 वर्षीय राजेन्द्र कुमार था। ईमानदारी देखिए दोनों ने ही डरते डरते पुलिस को बता दिया कि उनके पास स्मैक है।

    तहरीर के अनुसार इस पर एसअई जावेद ने उक्त व्यक्तियो से पूछा कि तुम अपने पास स्मैके होने की बात कह रहे हो क्या तुम अपनी तलाशी किसी राजपत्रित अधिकारी /मजिस्ट्रेट के समक्ष लिवाना चाहते हो बताओ यह तुम्हारा कानूनी अधिकार है । इस पर दोनों युवकों ने माफी मांगते हुए छोड देने की गुहार लगाई। जिसके बाद मौके से ही सीओ रौतेला को जदी मौके पर पहुंचने के लिए फोन किया गया। समय दो बजे से ज्यादा हो चुका था।

    अब सीओ साहब ने बताया कि वे अदालती कार्य से कोर्ट में हें इसलिए नहीं आ सकते। उन्होंने पुलिस टीम को सलाह दी कि वे उन्हें कोर्ट परिसर में ही ले आए वहीं उनकी तलाशी ले ली जाएगी। फिर पुलिस की टीम दोनों युवकों को लेकर कोर्ट परिसर पहुंच गई। यहां से दोबारा सीओ को फोना किया गया। फिर वहीं बात हुई, सीओ साहब कोर्ट में व्यस्त थे इसलिए उन्होंने कहा कि अभ्ज्ञी अदालत में व्यस्त हूं, आप लोग दोनों युवकों को लेकर उनके कार्यालय पहुंच जाएं।

    शाम लगभग चार बजे पुलिस टीम दोनों युवकों को लेकर पुलिस क्षेत्राधिकारी कार्यालय पहुंची। यहां आरोपियों की तलाशी से पहले पूरी पुलिस टीम की कांस्टेबल नरेश ने ली। फिर युवकों की बारी आई। चंद्रेक के पास से 4.1 ग्राम और राजेंद्र के पास 1.4ग्राम स्मैक बरामद हो गई। उनसे कुछ पूछताछ की गई। जिसमें उन्होंने बताया कि वे इस स्मैक को रूद्रपुर से अज्ञात व्यक्ति से लाते हैं। वगैरह वगैरह…अब शाम के पौने 6 बजे दोनों युवकों को गिरफ्तार किया जा सका।

    अब सवाल यह है कि दोनों तस्कर ईमानदार थे कि वे चार घंटे पुलिस के साथ यहां से वहां भटकते रहे और जेब में रखी पुड़िया कहीं नहीं फेंकी वर्ना पुलिस की तो सारी मेहनत पानी में मिलती ही अधिकारियों की डांट अलग से खानी पड़ती। अपराध की जानकारी होने के बावजूद पुलिस को लिखत पड़त की इतनी जटिल प्रकिया से गुजरना पड़ता है कि अपराधी अपराध को अंजाम देकर कहीं का कहीं निकल जाता है। इस मामले से तो यह बिल्कुल साफ हो गया। इसे देखकर तो लगता है जैसे कानून अपराधियों के लिए नहीं उलटे पुलिस के लिए बना है। फिर हम पुलिस से उम्मीद करते हें कि अपराध से पहले ही अपराधी को पकड़ ले…जरा सोचिए क्या इन परिस्थितियों में यह संभव है।

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